बड़ा सवाल _ राष्ट्र के सम्मान में गाए जाने वाले राष्ट्र गान में शामिल न होने वाले प्रिंसिपल व अध्यापक क्या नही कर रहे राष्ट्र और राष्ट्र गान का अपमान?
स्वामी आत्मानंद स्कूल मानपुर में अनुशासनहीनता व लापरवाही की पराकाष्ठा

शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष के औचक निरीक्षण में पकड़ी गई बड़ी लापरवाही
मोहला_मानपुर।
जिले के नक्सल प्रभावित मानपुर ब्लॉक मुख्यालय स्थित शिक्षा के मंदिर में अनुशासन हीनता व लापरवाही की पराकाष्ठा सामने आई है। दरअसल यहां तकरीबन हर रोज प्रार्थना एक भृत्य कराती हैं। वहीं अध्यापकगण प्रार्थना के बाद शाला पहुंचते हैं। प्राचार्य भी इस दरमियान अमूमन नदारत ही रहती हैं। इसकी कलई उस वक्त खुल कर सामने आ गई जब स्वामी आत्मानंद स्कूल के ही शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष राजहंस मंडावी ने स्कूल खुलने के समय औचक निरीक्षण किया तो उन्होंने देखा वाकई स्कूल में एक भृत्य प्रार्थना करा रही है तथा प्रिंसिपल समेत यहां पदस्थ तमाम अध्यापक नदारत हैं।
बच्चों ने बताया रोजाना भृत्य ही कराती है प्रार्थना- अध्यक्ष
दरअसल 27 अगस्त की सुबह साढ़े सात बजे उक्त स्कूल के शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष राजहंस मंडावी ने प्रार्थना के समय शाला का औचक निरीक्षण किया। इस दरमियान शाला में पदस्थ एक महिला भृत्य प्रार्थना में मुख्य रूप से मौजूद थी। वहीं शाला के प्रिंसिपल समेत कोई भी अध्यापक इस दौरान न तो स्कूल में बल्कि स्कूल के इर्द गिर्द भी मौजूद नही थे। अध्यक्ष राजहंस मंडावी स्वयं इस दरमियान उक्त भृत्य के साथ प्रार्थना में सहभागी बने। इस तमाम परिस्थिति से वाकिफ होने के बाद अध्यक्ष राजहंस मंडावी ने मौजूद मीडिया को बताया कि उन्होंने इस दौरान स्कूली बच्चो से चर्चा कि । बच्चों ने बताया कि रोजाना यहां भृत्य ही प्रार्थना कराती है। अध्यापक प्रिंसिपल उपस्थित नहीं रहते।
प्रधानमंत्री की मंशा से खिलवाड़,शौचालय का बुरा हाल, सुधरवाने की जहमत नहीं उठाई

राष्ट्र के मुखिया शौचालय की अनिवार्यता व स्वच्छता को अपना ड्रीम पोजेक्ट बनाए बैठे है इसके लिए प्रधान मंत्री जी योजनाएं बनाने के साथ साथ आम जनों को स्वच्छता का लगातार पाठ पढ़ा रहे हैं लेकिन लगता है कि मानपुर के आत्मानंद स्कूल के जिम्मेदार मुखिया को पी एम की नेक मंशा से कोई लेना देना नही है। विद्यालय की चौखट में ही शाला का शौचालय है जिसके दरवाजे टूटे हुए हैं। गंदगी का आलम है। कोई इसका उपयोग करे भी तो कैसे? शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष ने औचक निरीक्षण के दौरान उक्त शौचालय की भी दशा देखी। तथा इस पर उन्होंने दुख भी जताया । अब सवाल ये उठता है कि शौचालय व स्वच्छता की पैरवी करने वाले प्रधानमंत्री से युक्त भाजपा की सरकार राज्य में है वहीं स्कूल में भी भाजपा नेता बतौर पदाधिकारी काबिज हैं। ऐसे में शौचालय की दुर्दशा और उसे सुधरवा कर स्वच्छ भारत मिशन को आगे बढ़ाने की जहमत न उठाने वाले स्कूल के प्रशासनिक मुखिया प्रिंसिपल पर कोई कार्यवाही होती है या फिर कार्यवाही करवाने में सक्षम जिम्मेदार भाजपा नेता प्रधानमंत्री की मंशा को तार तार करने वाले जिम्मेदार को बचाने में दिलचस्पी दिखाते हैं। शाला समिति अध्यक्ष ने इस दौरान परिसर में घूमकर व्यवस्था को भी खंगाला तथा बच्चो से मिलकर व्यवस्था की उन्होंने जानकारी ली।
1964 के पुराने सबसे बड़ी शाला की कमान लापरवाह हाथो में, इसीलिए हो रहा बेड़ागर्क ?

ये स्कूल इलाके का सबसे पुराना, बड़ा स्कूल है। 1964 से स्थापित इस स्कूल में पढ़कर निकलने वाले आज कई बड़े अफसर व जन प्रतिनिधि सुमार हैं। अब तो ये स्कूल स्वामी आत्मा नंद स्कूल का तमगा पाकर और भी बड़ा हो गया है। ऐसे में इस स्कूल को एक ऐसे प्रशासक की आवश्यकता थी जो अनुभवी हो और जिम्मेदार हो लेकिन विडंबना ही कहें की कि अन्य ब्लॉक के एक स्कूल में पदस्थ महिला व्याख्याता को प्रतिनियुक्ति पर यहां का प्रिंसिपल बना दिया गया है। जबकि उक्त महिला व्याख्याता से कहीं ज्यादा सीनियर व अनुभवी व्याख्याता व प्रिंसिपल जिले में छोटे छोटे स्कूलों में पदस्थ होकर रह जाने को मजबूर हैं। वरिष्ठों के रहते अंग्रेजी व्याख्याता महज अंग्रेजी माध्यम के फेर में एक कनिष्ठ व्याख्याता को इस बड़े और इलाके के मुख्य स्कूल का मुखिया बना देना कहीं न कही स्कूल में व्याप्त बदइंतिजामी का बड़ा कारण प्रतीत हो रहा है। ऐसा लगता है मानो4 इस महत्वपूर्ण स्कूल की कमान शासन ने लापरवाह हाथो में सौंप रखी है जिसके चलते अंग्रेजी व हिंदी दोनो माध्यम वाले अहम स्कूल में व्यवस्था का बेड़ागर्क हो रखा है।
विवादों से घिरा रहा है आत्मानंद स्कूल, जिम्मेदार पर कार्यवाही नही
अपने स्थापना काल के बाद से विभिन्न समयों में ये आत्मानंद स्कूल विवादो में घिरा रहा है। बीते सत्र में तो ऐसा वाकया सामने आया था जब कथित तौर पर यहां बच्चो को बेवजह टॉर्चर लिए जाने की घटना सामने आई थी। बच्चों के पालकों की शिकायत पर तब एस डी एम ने मामले की जांच पड़ताल की थी। उस दौरान जिम्मेदार अफसरों से मिली जानकारी के मुताबिक उक्त मामला लगभग सत्य भी पाया गया था। यही नहीं हाल के सत्र में शाला में बच्चों के प्रवेश के लिए किए जाने वाले लॉटरी पद्धति में भी अनियमितता की खबर आते रही है। इस तरह से उक्त विद्यालय में बीते कुछ समय के दौरान विभिन्न विवादास्पद दौर आते रहे हैं। जिससे विद्यालय के प्रबंधन व मुखिया के कार्य प्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है।
इतने सारे वरिष्ठ व्याख्याता व प्रिंसिपल फिर भी कनिष्ठ को सौंप दी बड़े स्कूल की जिम्मेदारी, समझ से परे!
स्कूल में यदि प्रिंसिपल जिम्मेदारी से काम करे तो बाकी के स्टॉफ का न केवल मनोबल बढ़ता है बल्कि स्टॉफ भी जिम्मेदारी से काम करता है। अब प्रार्थना जैसे अनिवार्य तथा राष्ट्र के सम्मान से जुड़े गतिविधि में प्राचार्य ही नदारत रहे तो बाकी के स्टॉफ से कैसे जिम्मेदारी की उम्मीद करें। जिले में कई वरिष्ठ व अनुभवी व्याख्याताओं तथा प्रिंसिपल के रहते ऐसे प्रिंसिपल की यहां नियुक्ति करना समझ से परे है जो राष्ट्र के सम्मान के लिए गाए जाने वाले राष्ट्र गान में शामिल न हो सके।
मामला मेरे संज्ञान में आया है। इसकी जांच करवाऊंगा। दोष पाया गया तो कार्यवाही जरूर करूंगा-
फत्ते राम कोसरिया प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मोहला,मानपुर,चौकी
मोहला -मानपुर से विशेष संवाददाता -जावेद शेख की रिपोर्ट

